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तेंदूपत्ता गोदाम अग्निकांड : 14 जिम्मेदारों की लापरवाही से 10 करोड़ स्वाहा

वनमंत्री ने DFO पर गिराई गाज, लेकिन गोदाम की निगरानी के लिए तैनात 14 अधिकारी-कर्मचारी अब तक सवालों के घेरे में

बीजापुर – जिला मुख्यालय से लगे ग्राम ईटपाल स्थित तेंदूपत्ता गोदाम में हुई भीषण आगजनी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में लगभग 25 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता तथा पूरा गोदाम जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार सरकार को 8 से 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
कागजों में तैनात रहे 14 जिम्मेदार, आग में जल गया करोड़ों का तेंदूपत्ता——
          घटना के बाद राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन डीएफओ रमेश कुमार जांगड़े को रायपुर अटैच कर दिया है। वहीं पुलिस और विभागीय जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार पुलिस को जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं तथा चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
तेंदूपत्ता की रखवाली का कागजो में आदेश था, लेकिन धरातल पर नही हुआ पालन ! , जिम्मेदार रहे नदारद—
मामले में सबसे बड़ा सवाल उस आदेश को लेकर उठ रहा है जो 19 मई 2026 को जारी किया गया था। इस आदेश के तहत ईटपाल गोदाम की सुरक्षा, रखरखाव और निगरानी के लिए 14 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
इनमें शामिल थे—
2 गोदाम नियंत्रणकर्ता
4 गोदाम प्रभारी 
8 गोदाम सहायक प्रभारी
सूत्रों के अनुसार इन 14 लोगों में उपवन परिक्षेत्र अधिकारी, प्रबंधक एवं वनरक्षक स्तर के कर्मचारी भी शामिल थे। आरोप है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को गोदाम की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, वे आग लगने के समय मौके पर मौजूद नहीं थे।
एक गोदाम की सुरक्षा भी नहीं कर पाया विभाग—
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब एक गोदाम की निगरानी और सुरक्षा के लिए 14 लोगों की जिम्मेदारी तय थी, तब इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई? क्या आदेश केवल कागजों तक सीमित था या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर अपने कर्तव्यों की अनदेखी की?
सिर्फ DFO पर कार्रवाई, बाकी जिम्मेदार कब???
डीएफओ पर तत्काल कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन गोदाम की प्रत्यक्ष निगरानी के लिए तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या विभागीय आदेश की अवहेलना करने वालों को संरक्षण मिल रहा है???
गोदाम सुरक्षा के लिए तैनात 14 जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कब होगी?
क्या कार्रवाई केवल डीएफओ तक सीमित रहेगी या अन्य जिम्मेदारों पर भी गाज गिरेगी?
10 करोड़ के नुकसान का जवाबदेह आखिर कौन है?
जांच के बाद खुल सकते हैं बड़े राज—–
पुलिस और विभागीय जांच की दिशा अब गोदाम की सुरक्षा व्यवस्था, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका और आग लगने के कारणों पर केंद्रित है। जांच में यदि लापरवाही या आदेश की अवहेलना साबित होती है तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
             फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 14 लोगों की जिम्मेदारी तय थी, तब ईटपाल का तेंदूपत्ता गोदाम आखिर राख कैसे हो गया?

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