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PMGSY में ठेकेदारों का फूटा गुस्सा: ईई के रवैये से बढ़ी नाराजगी, मानसिक-आर्थिक प्रताड़ना का आरोप

निर्माणाधीन सड़कों को निरस्त करने, भुगतान में देरी और अनावश्यक पेनल्टी से काम प्रभावित होने का दावा

बीजापुर। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत जिले में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों को लेकर ठेकेदारों और विभाग के बीच तनाव की स्थिति बनती नजर आ रही है। जिले में कार्यरत कई ठेकेदारों ने विभाग के प्रभारी कार्यपालन अभियंता (ईई) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

ठेकेदारों का कहना है कि निर्माणाधीन सड़कों को बिना पर्याप्त कारण और स्पष्ट तकनीकी आधार के निरस्त किया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जिन कार्यों में काफी हद तक प्रगति हो चुकी है, उन्हें भी अचानक निरस्तीकरण की प्रक्रिया में डाल दिया जाता है, जिससे निर्माण एजेंसियों के सामने संकट की स्थिति बन रही है।

ठेकेदारों ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग द्वारा समय पर बिल भुगतान नहीं किया जा रहा है। भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण निर्माण एजेंसियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही बिना संतोषजनक कारण बताए अनावश्यक पेनल्टी लगाए जाने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

निर्माण एजेंसियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण कई परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही है। उनका दावा है कि बार-बार की प्रशासनिक अड़चनों और सख्त रवैये के चलते ठेकेदार मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, जिसका सीधा असर जिले में सड़क निर्माण कार्यों की प्रगति पर पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर निर्माण एजेंसियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। ठेकेदारों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर जिले की विकास परियोजनाओं पर पड़ सकता है।

वहीं, इस पूरे मामले में जब PMGSY के प्रभारी कार्यपालन अभियंता से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इस संबंध में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अब देखने वाली बात यह होगी कि ठेकेदारों की शिकायतों पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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