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कमीशनखोरी के आरोपों के बीच PMGSY कार्यों पर सवाल, बीजापुर में घटिया पुलिया निर्माण

PMGSY में भ्रष्टाचार का खेल! बीजापुर में घटिया पुलिया निर्माण पर उठे सवाल—–

ठेकेदार–इंजीनियर की मिलीभगत के आरोप, मानकों को दरकिनार कर किया जा रहा निर्माण—-

बीजापुर –  जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ताज़ा मामला जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक नवीन सड़क मार्ग पर बन रही पुलिया का है, जहां निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

मौके से सामने आई तस्वीरें निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति को उजागर कर रही हैं। बताया जा रहा है कि पुलिया निर्माण में जहां मानकों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में सीमेंट और निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए, वहीं ठेकेदार द्वारा सीमेंट की मात्रा कम रखकर अधिक मात्रा में रेत का उपयोग किया जा रहा है। इससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इतना ही नहीं, पुलिया निर्माण में जहां निर्धारित 20 एमएम गिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण कार्य में इस प्रकार की लापरवाही से पुलिया की गुणवत्ता और उसकी दीर्घकालिक मजबूती पर संदेह उत्पन्न हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी प्रकार से निर्माण जारी रहा तो भविष्य में यह पुलिया कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।

स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह पूरा खेल ठेकेदार और विभागीय इंजीनियर की मिलीभगत से चल रहा है। उनके अनुसार निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उन्हीं की मौजूदगी में मानकों की अनदेखी कर घटिया निर्माण कराया जा रहा है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और बंदरबांट की आशंका भी जताई जा रही है।

मामले को लेकर जब संबंधित विभागीय इंजीनियर से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने मीडियाकर्मियों का फोन उठाना तक उचित नहीं समझा। इंजीनियर की इस चुप्पी ने पूरे मामले में विभागीय कार्यप्रणाली पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क और मजबूत आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि इसी प्रकार से गुणवत्ता से समझौता कर निर्माण किया जाएगा तो योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करता है या फिर मामला कागजों में ही दबकर रह जाता है।

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