
काम पूरा, भुगतान अधूरा: छत्तीसगढ़ में ठेकेदार आर्थिक संकट की गिरफ्त में
सरकार बदली, सिस्टम नहीं: छत्तीसगढ़ में ठेकेदार भुगतान को तरसे

बीजापुर – राज्य में विभिन्न सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदार इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आरोप है कि बीते लगभग तीन वर्षों से अलग-अलग विभागों के अंतर्गत सड़क, भवन और अन्य विकास कार्य तो समय सीमा में पूरे कराए गए, लेकिन उनके भुगतान लंबित रखे गए हैं।
ठेकेदारों का कहना है कि सरकारें बदलीं — कभी कांग्रेस, अब भारतीय जनता पार्टी — लेकिन भुगतान प्रणाली की समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका आरोप है कि काम पूरा होने के बाद भी फाइलें महीनों नहीं, बल्कि एक से दो वर्षों तक अटकी रहती हैं।
गुणवत्ता का दबाव, भुगतान में इंतजार—–
निर्माण एजेंसियों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा गुणवत्तापूर्ण कार्य और समय सीमा का कड़ाई से पालन करने का दबाव लगातार बनाया जाता है। कार्य पूर्ण होने के बाद माप पुस्तिका, तकनीकी परीक्षण और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर बार-बार नई जांच बैठाई जाती है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और लंबी हो जाती है।
कर्ज और मजदूरी का बोझ—–
भुगतान अटकने से कई ठेकेदार बैंक ऋण, मशीनरी किराया और मजदूरों की मजदूरी देने में असमर्थ हो रहे हैं। कुछ ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “सरकारी काम करने के बाद भी निजी उधारी लेकर मजदूरी चुकानी पड़ रही है।”
दफ्तरों के चक्कर, समाधान नहीं—-
ठेकेदारों का आरोप है कि वे महीनों से विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार फाइल नई आपत्ति के साथ लौटा दी जाती है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार से मांग—-
प्रभावित ठेकेदारों ने लंबित भुगतान जल्द जारी करने, जांच प्रक्रिया को समयबद्ध करने और भुगतान ट्रैकिंग की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो निर्माण कार्यों की गति भी प्रभावित हो सकती है।




